Monday, July 22nd, 2019

बिहार के आदित्य ने पहली बार में निकाला JEE Main , NEET और AIIMS MBBS एंट्रेंस

 पटना
                                                                                                                      
मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। बस इच्छाशक्ति होनी चाहिए, फिर तो सफलता कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही बिहार के होनहार बेटे आदित्य कुमार सिंह ने कर दिखाया है। पटना के बेली रोड पर स्थित केंद्रीय विद्यालय के छात्र आदित्य ने पहली बार में ही जेईई मेन, नीट और एम्स की प्रवेश परीक्षा में सफलता पायी है। इतना ही नहीं, आदित्य कुमार को भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु (आईआईएस) में किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना में रिसर्च के तौर पर चयन हुआ है। 

आदित्य कुमार को जेईई मेन में 19 हजार रैंक, नीट में 1758 रैंक, एम्स में 28 सौ रैंक मिली है। वहीं आईआईएस, बेंगलुरु में 401 रैंक प्राप्त हुई है। आदित्य कुमार की मानें तो वो मेडिकल की तरफ ही अपना कॅरियर बनाना चाहता है। अभी नीट में 15 फीसदी लोगों ने काउंसिलिंग में रजिस्ट्रेशन करवाये हैं। आदित्य कुमार ने बताया कि 12वीं में भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान के साथ अतिरिक्त विषय के तौर पर गणित लिया था। इसका फायदा मुझे दोनों प्रवेश परीक्षा देने में हुआ। 

आदित्य ने बताया कि मेरी इस सफलता के पीछे स्कूल की नियमित पढ़ाई थी। क्योंकि मैं एक भी दिन स्कूल से अनुपस्थिति नहीं रहता था। प्लस टू में 96 फीसदी उपस्थिति रही। स्कूल के शिक्षक हर विषय में कांसेप्ट क्लीयर करके पढ़ाते हैं। इससे हर चैप्टर पर पूरी पकड़ थी। मूल रूप से बिहारशरीफ के रहने वाले आदित्य कुमार के पिता कृष्ण कांत सिंह एयरफोर्स से सेवानिवृत्त होकर बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्यरत हैं। वहीं माता पिंकी सिंह गृहिणी हैं। 

चिकन पॉक्स के कारण जेईई एडवांस नहीं दिया
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान आदित्य कुमार को चिकन पॉक्स हो गया था। आदित्य कुमार ने बताया कि चिकन पॉक्स होने के कारण जेईई एडवांस नहीं दे पाया। चूंकि दो पालियों में जेईई एडवांस लिया जाता, इसलिए इतनी देर मैं बैठ नहीं पाता। चिकन पॉक्स के दौरान ही एम्स की परीक्षा में शामिल हुआ था। 
 IIT बॉम्बे भारत का बेस्ट संस्थान
पीके सिंह (प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय, बेली रोड) ने कहा- आदित्य कुमार ये यह कर दिखाया कि योजना सही दिशा में बने तो सफलता मिलती है। इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी अलग-अलग है लेकिन सेल्फ स्टडी से हर कुछ संभव है।  

Source : Agency

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