Thursday, October 17th, 2019

नए इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने पर रोक की तैयारी, शिक्षा के गिरते स्तर से चिंतित AICTE

 नई दिल्ली
 
इंजीनियरिंग शिक्षा के गिरते स्तर से चिंतित अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की एक समिति ने वर्ष 2020 से नये इंजीनियरिंग कालेज खोलने की मंजूरी पर रोक लगाने, पुराने प्रचलित इंजीनियरिंग कोर्स में और सीटें नहीं बढ़ाने तथा उद्योग..अकादमिक सम्पर्क का व्यवस्थित इकोसिस्टम तैयार करने का सुझाव दिया है। बी आर मोहन रेड्डी की अध्यक्षता वाली एआईसीटी की समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंपे ''तकनीकी शिक्षा के लिये लघु एवं मध्यम स्तरीय परिप्रेक्ष्य" योजना संबंधी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंजीनियरिंग संकाय में स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर पर क्षमता उपयोग की स्थिति 2017-18 में 49.8 प्रतिशत है। ऐसी स्थिति में और क्षमता उन्नयन के लिये कालेजों की स्थापना के लिये इमारत, प्रयोगशाला सहित अन्य सुविधाओं के विकास के लिये काफी धन की जरूरत होगी। ऐसे में समिति ने सुझाव दिया है कि 2020 के बाद से नयी क्षमता का निर्माण नहीं किया जाए। नयी क्षमता के निर्माण के विषय पर इसके बाद प्रत्येक दो वर्ष में समीक्षा की जा सकती है।

इसमें कहा गया है कि नये क्षमता निर्माण के संबंध में पिछले दो वर्षो और वर्तमान वर्ष में कई आवेदन लंबित हैं। अगर इनके संबंध में आधारभूत ढांचा पहले से तैयार है तब एआईसीटीई को क्षमता उपयोग को विभिन्न राज्यों में अतिरिक्त क्षमता को मंजूरी देने के संदर्भ में क्षमता उपयोगिता के आधार पर विचार करना चाहिए। एआईसीटीई की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर के इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में 2017-18 में कुल मंजूर सीटें 16,62,470 थी । इस शिक्षा सत्र में इनमें से सिर्फ 8,18,787 सीटें ही भर सकीं और इनमें से मात्र 3,45,215 बच्चों का प्लेसमेंट हुआ था।

एआईसीटीई की रिपोर्ट में कहा गया है कि मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, सिविल और इलेक्ट्रानिक्स जैसे पारंपरिक इंजीनियरिंक संकायों में 40 प्रतिशत सीटें ही भर पा रही है जबकि कम्प्यूटर विज्ञान, मेकाट्रोनिक्स एवं एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्थिति इससे काफी बेहतर है। इससे स्पष्ट होता है कि उभरती हुई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मांग है। ऐसे में समिति ने पारंपरिक इंजीनियरिंग क्षेत्र में अतिरिक्त सीटें नहीं बढ़ाने का सुझाव दिया है।

समिति ने एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों में पायलट परियोजना के आधार पर 20 राष्ट्रीय क्रियात्मक ज्ञान केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया है । इसमें कहा गया है कि छात्रों में व्यावहारिक पहल को प्रोत्साहित करना चाहिए और उन्हें वास्तविक जीवन से जुड़ी सामाजिक आर्थिक समस्याओं से अवगत होना चाहिए।

समिति ने उद्योग..अकादमिक सम्पर्क का व्यवस्थित इकोसिस्टम तैयार करने का सुझाव दिया है । इसमें सुझाव दिया गया है कि शिक्षकों को नयी प्रौद्योगिकी से अवगत होने के लिये उद्योगों का दौरा करना चाहिए । उद्योगों में एप्रेंटिशिप को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए । प्रत्येक संस्थान में सलाहकार के तौर पर उद्योगों के दो प्रतिनिधि होने चाहिए। एआईसीटीई के एक अधिकारी बताते हैं, 'निजी कॉलेज हमारी इजाजत लिए बिना ही लगातार सीटें बढ़ाते रहते हैं। इससे भी कई तरह की दिक्कतें हो रही हैं क्योंकि ज्यादातर बच्चे प्राइवेट कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ही प्रवेश लेते हैं। गौरतलब है कि इंजीनियरिंग में 52 प्रतिशत सीट देश के पांच दक्षिणी राज्यों आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल में हैं। 

Source : Agency

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