Friday, August 23rd, 2019

16 जुलाई को चंद्रग्रहण, ज्योतिषी बता रहे इन मामलों में अशुभ


16 जुलाई की रात को पड़ने वाला चंद्रग्रहण एशिया, अफ्रीका, यूरोप, दक्षिण-अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा। भारत में यह चंद्रग्रहण 16 व 17 जुलाई की मध्यरात्रि में 1 बजकर 30 मिनट से 4 बजकर 30 मिनट तक देश के सभी हिस्सों में यह ग्रहण दिखाई देगा। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से लंबी अवधि तक दिखाई देने वाला यह चंद्रग्रहण भारत सहित पाकिस्तान, मध्य-एशिया और दक्षिण-अमेरिका के लिए विशेष रूप से अशुभ साबित हो सकता है। ग्रहण के समय चंद्रमा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में होकर धनु और मकर दोनों राशियों को प्रभावित करेंगे। अग्नि तत्व की राशि धनु के अंतिम अंशों से शुरू होकर यह चंद्रग्रहण मकर राशि के शुरुआती अंशों को पीड़ित करता हुआ बेहद तीव्र रूप से फल देने वाला होगा।

 

चंद्रग्रहण का भारत पर ऐसा रहेगा प्रभाव
चंद्रग्रहण के समय वृषभ लग्न उदय हो रहा होगा, जो कि आजाद भारत की कुंडली का जन्म लग्न है। लग्न से अष्टम भाव में चंद्रमा ग्रहण के समय शनि और केतु से युत होंगे। मिथुन राशि में चल रहे सूर्य और शुक्र की चंद्रमा पर दृष्टि रहेगी। आचार्य वराहमिहिर के अनुसार, धनु राशि में पड़ने वाला ग्रहण मंत्रियों, प्रधान पुरुषों, प्रधान अमात्यों, चिकित्सकों, व्यापारियों, हथियार रखने वालों तथा पंजाब क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद कष्टकारी होता है। ग्रहण के प्रभाव से भारत के कई बड़े नेताओं को कष्ट से गुजरना होगा, इनके लिए समय संकटकारी हो सकता है। राजनीतिक उठापटक से अस्थिरता का माहौल बनेगा। ग्रहण के समय मंगल का कर्क राशि में होकर तीसरे घर को पीड़ित करना भारत-पाक सीमा पर तनाव बढ़ने का संकेत हैं।

 

ग्रहण का यह संकेत शुभ नहीं
गृह मंत्रालय की कश्मीर नीति से जम्मू-कश्मीर में कई प्रदर्शन हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त ग्रहण के समय गुरु और मंगल का जलीय राशियों में होना अगले 15 दिनों में भारत के कई हिस्सों में बाढ़ से तबाही ला सकता है। 17 जुलाई की रात से ही तेज वर्षा के चलते उत्तर और मध्य भारत के कई शहरों में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित होगा। किसानों के लिए यह ग्रहण शुभ होगा। जुलाई के दूसरे पखवाड़े और फिर अगस्त के पहले हफ्ते में मंगल का कर्क राशि में गोचर वर्षा में वृद्धि कर सूखे से संघर्ष कर रहे किसानों को बड़ी राहत देगा।

 

सोना चांदी में आएगी तेजी
ग्रहण के समय सूर्य मिथुन राशि में होकर शनि की दृष्टि से पीड़ित होंगे साथ ही शुक्र भी मिथुन राशि में इस योग से प्रभावित होंगे। सोने के कारक ग्रह सूर्य और गुरु हैं तथा चांदी का कारक शुक्र और चंद्रमा हैं। गुरु वृश्चिक राशि में इस समय वक्री चल रहे हैं अत: सूर्य और शुक्र के पीड़ित होने से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आएगी।

 

भूकंप का होगा खतरा
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र कूर्म चक्र में पंजाब और पाकिस्तान के क्षेत्र को इंगित करता है। ग्रहण के समय उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का पीड़ित होना पाकिस्तान, पंजाब और उत्तर भारत में किसी भूकंप के आने का योग बना रहा है। इसके अतिरिक्त मकर राशि से प्रभावित हिमाचल प्रदेश में अगले 15 दिनों में बादल फटने से जन-धन का नुकसान करवा सकता है।

ग्रहण के समय मिथुन राशि में सूर्य और राहु की युति के कारण दक्षिण अमेरिका के देशों में भूकंप का योग बन रहा है। ग्रहण के समय बड़े ग्रहों गुरु और शनि का वक्री होना तथा मंगल का अपनी नीच राशि कर्क में बुध से युत होना भी प्राकृतिक आपदा की ओर संकेत कर रहा है। अगले 15 दिनों में मेक्सिको, पेरू, इक्वाडोर जैसे दक्षिण अमेरिका के देशों को प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ सकता है।

 

Source : Agency

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