Monday, April 6th, 2020

महाशिवरात्रि पर शिवमय हुआ हरिहरक्षेत्र, निकली शिव बारात

वैशाली 
फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी के मौके पर शुक्रवार को नगर महादेव पातालेश्वर नाथ मंदिर से शिव-पार्वती विवाह की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने महादेव का जलाभिषेक किया और भगवान शिव के मुख्य वाहन बैलगाड़ी के गाड़ीवान बने। शोभायात्रा में भूत बेताल सहित विभिन्न देवी-देवताओं की 100 झांकियां शामिल हुई।

पुजारी प्रमोद झा ने बताया कि वैसे तो पूजा-अर्चना सुबह से ही शुरू हो गई। महाशिवरात्रि से शुरू होकर अगले दिन यानी 22 फरवरी दिन शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी। हरिहरनाथ मंदिर में गुरुवार बाबा को हल्दी लगाई गई। 

पुजारी प्रमोद झा ने बताया कि शनिवार को पंचक प्रारंभ हो रहा है। इसलिए 21 फरवरी को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। रात्रि प्रहर की पूजा शाम को 6 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक होगी। अगले दिन सुबह मंदिरों में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाएगी। उन्होंने बताया की एक वर्ष में 12 शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि महाशिवरात्रि के नाम से जानी जाती है।

महाशिवरात्रि को लेकर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। एक मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन शिव जी का अवतरण हुआ था। शिवजी अग्नि ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। अन्य मान्यता है कि महाशिवरात्रि में भगवान शिव-शंकर और माता शक्ति का मिलन हुआ था। देश में 12 ज्योतिर्लिंग माने जाते हैं। जिनके दर्शन पूजन से मानव का कल्याण होता है। शिवभक्त इस दिन का पूरे वर्षभर इंतजार करते हैं। 

स्टेशन चौक स्थित शिवमंदिर के पुजारी अशोक बाबा ने बताया कि भगवान का पूजन शमी का पत्ता, सुगंधित पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, भांग, बेलपत्र, तुलसी, गाय का दूध, गंगाजल, पंचमेवा, पंचरस इत्र आदि से करना चाहिए। पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप लाभदायक है। जल और दूध के अभिषेक से भगवान प्रसन्न होते हैं।

नगर महादेव पातालेश्वर नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी प्रशांत बाबा ने बताया कि बारात की तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है। बारात को लेकर देर रात्रि तक मंदिर एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में तैयारी चलती रही। 

वहीं शिव विवाह शोभायात्रा में श्रद्धालुओं भारतीय संस्कृति के दर्शन हुये। इसमें वैदिक धार्मिक एवं सामाजिक झांकियां लोगों को रोमांचित की। एक तरफ शेर पर सवार भारत माता का सशक्त रूप दिखा, वहीं महाकाल तांडव करते हुए भी दिखे। बाल-विवाह के रोक पर झांकी होगी तो वीरांगना झांसी की रानी भी दिखी। मिट्टी से जुड़े बाबा भुइयां साईं बाबा सती अनुसुइया की झांकी भी दिखाई दी,  तो भगवान चित्रगुप्त लेखा-जोखा करते दिखे। शक्ति के  अधिष्ठात्री मां दुर्गा, विद्या की देवी सरस्वती मां सरस्वती लक्ष्मी राम दरबार सहित अनेक झांकियां देख लोग चकित ही गयें। झांकी में शामिल लोगों ने बताया कि झांकी प्रदर्शन के लिए रोमांचित हूं। हर वर्ष किसी न किसी झांकी में शामिल होता हूं। अच्छा लगता है।

Source : Agency

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