Wednesday, June 3rd, 2020

सुप्रीम कोर्ट ने कहा आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए सरकार दे लोन, GST करे माफ

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार के वकील को कड़ाई से संदेश दिया कि वह सरकार से कहें कि आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ तुरंत लोन के तौर पर उपलब्ध कराए और सरकार जीएसटी के तौर पर बनने वाले 1000 करोड़ टैक्स छोड़ करे क्योंकि अब इस प्रोजेक्ट में कोई प्राइवेट प्लेयर नहीं है बल्कि एनबीसीसी बना रहा है। फ्लैट बॉयर्स की ओर से पेश एडवोकेट एमएल लाहौटी ने कहा कि अनसोल्ड प्रॉपर्टी को बेचकर 2220 करोड़ आ सकता है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की बेंच ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई की। बॉयर्स के वकील एमएल लाहोटी ने एनबीटी को बताया कि उन्होंने कोर्ट के सामने एक नोट पेश किया जिसमें बताया गया कि आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए अनसोल्ड प्रॉपर्टी को बेचकर 2220 करोड़ आ सकते हैं ऐसे 5228 यूनिट अनसोल्ड हैं। साथ ही कहा कि 398 बोगस अलॉटमेंट आम्रपाली ने कर रखे हैं उससे भी पैसे आएंगे। साथ ही 5856 फ्लैट को आम्रपाली ने कम वैल्यू में बेचे हैं उससे 345 करोड़ की रिकवरी हो सकती है। आम्रपाली के तमाम प्रॉपर्टी की निलामी के जो सुप्रीम कोर्ट के तमाम आदेश हुए हैं उससे 7881 करोड़ आ सकते हैं। आम्रपाली के डायरेक्टर्स की संपत्ति से 799 करोड़ रुपये आ सकेंगे।

ईडी ने जेपी मॉर्गन कंपनी में 187 करोड़ रुपये के डायवर्जन की बात बताई
लाहौटी ने बताया कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल को कड़ाई से संदेश दिया कि वह सरकार से कहें कि तुरंत आम्रपाली प्रोजेक्ट के लिए 500 करोड़ लोन उपलब्ध कराए और जीएसटी के तौर पर 1000 करोड़ की छूट दे। अदालत ने कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कोई प्राइवेट प्लेयर नहीं है बल्कि एमबीसीसी प्रोजेक्ट पूरा कर रहा है। साथ ही ईडी ने जेपी मॉर्गन कंपनी में 187 करोड़ रुपये के डायवर्जन की बात बताई, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कंपनी की संपत्ति अटैच किया जाए और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई हो। सुप्रीम कोर्ट ने अडिशनल सॉलिसिटर जनरल से कहा है कि वह बॉयर्स के वकील एमएल लाहौटी के सुझाव के बारे में प्लान लेकर आए कि कैसे एक्शन होगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी से कहा है कि वह आम्रपाली के हार्टबीट और टेक पार प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर जारी करें।

दो दिसंबर 2019 को दिए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट बॉयर्स को कहा था कि वह अपनी बकाया राशि 31 जनवरी तक जमा कराए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बकाया राशि फ्लैट बायर्स एक बार में जमा करे या किश्तों में भुगतान करे ताकि रुके हुए प्रोजेक्ट का काम तेजी से पूरा हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फंड को चैनेलाइज्ड करने की जरूरत है ताकि पेंडिंग प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 3 हजार करोड़ बकाये में से 105 करोड़ रुपये बॉयर्स के आए हैं। पिछले साल 23 जुलाई को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप का रजिस्ट्रेशन कैंसल कर दिया था और कहा था कि आम्रपाली के पेंडिंग प्रोजेक्ट सरकारी कंपनी एनबीसीसी पूरा करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली का लीज भी कैंसल कर दियाथा सुप्रीम कोर्ट ने एक कोर्ट रिसिवर नियुक्त कर दिया था जो ट्राई पार्टी एग्रीमेंट करेंगे और बॉयर्स को फ्लैट का पोजेशन मिले ये सुनिश्चित करेंगे। कोर्ट ने कहा था कि होम बॉयर्स अपनी बकाया राशि सुप्रीम कोर्ट स्थित यूको बैंक में जमा करें।

Source : Agency

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