Saturday, July 11th, 2020
Close X

वास्तुदोष के साथ इन बीमारियों को भी दूर करता है ॐ का जाप


शांत मन से कुछ समय नियमित रूप से ॐ का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का केंद्र है। असीमित शक्ति व संपन्नता का प्रतीक ॐ ब्रह्म स्वरुप स्वतः सिद्ध शब्द है, जिसके नियमित स्मरण, उच्चारण, ध्यान से सुख-शांति और धन-ऐश्वर्य सभी प्राप्त होकर अनेक रोगों व तनावों से मुक्ति मिलती है। आत्मिक बल मिलता है एवं जीवनशक्ति उर्ध्वगामी होती है। अतःरोगों को दूर कर तन-मन को स्वस्थ्य रखने के लिए हमें शांत मन से कुछ समय नियमित रूप से ॐ का उच्चारण अवश्य करना चाहिए।

थायरॉइड के लिए ॐ का जप
 ॐ का उच्चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

 घबराहट कम करने और खून के प्रवाह के लिए
 अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से कुछ ही देर में ठीक हो जाती है एवं इसका उच्चारण हृदय में खून के प्रवाह को संतुलित रखता है।

ॐ और तनाव
यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है। ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।

पाचन और स्फूर्ति के लिए
ॐ के नियमित उच्चारण से पाचन शक्ति तेज होती है। इससे चेहरे पर कांति आती है। शरीर में स्फूर्ति का संचार होता है। थकान से बचने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।

ॐ और नींद
 नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।

स्वस्थ फेफड़े के लिए
 कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मजबूती आती है।

ॐ और रीढ़ की हड्डी
 ॐ के पहले शब्द का उच्चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।

वास्तुदोष निवारण में सहायक
वास्तुविज्ञान के अनुसार वास्तुदोषों के कारण उत्पन्न हुए अनिष्ट प्रभाव से राहत पाने के लिए भी ॐ का इस्तेमाल लाभकारी है। यह सभी मांगलिक चिन्हों में श्रेष्ठ है। दरवाजे के ऊपर ॐ का चिन्ह अंकित करने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं हैं।किसी भी कमरे में वास्तुदोष निवारण के लिए इसे लगा सकते हैं पर ध्यान रहे कि इसका प्रयोग किसी अपवित्र जगह न करें । ॐ के उच्चारण से आस-पास के वातावरण में धनात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है । नकारात्मक ऊर्जा,बीमारी,चिंता,दुःख आदि सब नष्ट हो जाते हैं। घर के वास्तुदोष को दूर करने के लिए ॐ का जप करते समय जल से भरी हुई कटोरी सामने रखें और जप की समाप्ति पर उस जल को पूरे घर में छिड़क दें, कई दिनों तक ऐसा करने से धीरे-धीरे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता जाएगा एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ेगी जिससे घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होगा।

Source : Agency

आपकी राय

3 + 3 =

पाठको की राय