Wednesday, October 21st, 2020
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इस विटमिन की कमी से बढ़ सकती है ब्रेस्ट कैंसर की संभावना

 

एक वक्त था जब ब्रेस्ट कैंसर को सिर्फ महिलाओं की बीमारी माना जाता था। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। महिलाओं की तरह ही पुरुष भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। अंतर सिर्फ इतना है महिलाओं में यह बीमारी बहुत कॉमन है और पुरुषों में कम देखी जाती है। यहां जानें, आखिर क्यों महिला और पुरुष इस बीमारी की चपेट में आते हैं...

-किसी एक बीमारी के होने की कई अलग-अलग वजह हो सकती हैं। लेकिन कुछ बजह बहुत कॉमन होती हैं, जो कई खतरनाक बीमारियों को ट्रिगर करती हैं। ब्रेस्ट कैंसर के मामले में ऐसी ही एक समस्या है विटमिन-डी की कमी होना।

-कई अलग-अलग स्टडी में यह बात सामने आ चुकी है कि शरीर में एक्स्ट्रा फैट जमा होने पर ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक होता है। लेकिन इसके साथ ही यह भी एक सच्चाई है कि यदि बॉडी में विटमिन-डी की कमी हो तब भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

-यदि किसी व्यक्ति को फैट की समस्या हो और उनके शरीर में विटमिन-डी की कमी भी हो जाए तो उनके लिए ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

-ब्रेस्ट कैंसर का इलाज करनेवाले डॉक्टर्स का कहना है कि आमतौर पर इस समस्या से जूझ रहे लोगों (महिलाओं और पुरुष दोनों) में विटमिन-डी की कमी होना एक आम लक्षण हैं और ज्यादातर मरीजों में यह दिक्कत देखने को मिलती है।

-ब्रेस्ट कैंसर से बचने का सबसे आसान तरीका है कि आप अपने शरीर में पोषक तत्वों की कमी ना होने दें। खासतौर पर विटमिन-डी की कमी को लेकर सतर्कता बरतें। क्योंकि विटमिन-डी और विटमिन-सी दो ऐसे पोषक तत्व हैं, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने का काम करते हैं।

-हमारे देश में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में विटमिन-डी की कमी अधिक देखने को मिलती है। यह भी एक वजह हो सकती है कि यह कैंसर महिलाओं को बड़ी संख्या में अपनी चपेट में ले रहा है।

-विटमिन-डी की कमी के कारण हर समय थकान रहती है, रोगी तनाव महसूस करता है। मानसिक थकान और सिर में भारीपन रह सकता है।

-जिन लोगों के शरीर में विटमिन-डी की कमी होती है, उनकी मांसपेशियों में दुखन और हड्डियों में दर्द की समस्या होती है। हल्की-सी चोट लगने पर भी हड्डी टूट सकती है। चोट लगने पर चोट ठीक होने में और फ्रैक्चर होने पर इसे ठीक होने में अधिक समय लगता है।

-विटमिन-डी की कमी के कारण शरीर में जिस तरह की समस्याएं होती है, वे हमारे शरीर के हॉर्मोनल स्तर को अधिक प्रभावित करती हैं। जिन लोगों के शरीर में विटमिन-डी कम होता है, उनके शरीर में सेरोटॉनिन हॉर्मोन कम प्रड्यूस होता है। इससे मूड अधिक नेगेटिव रहता है।

-मूड खराब रहने, थकान रहने, शरीर में दर्द रहने जैसी समस्याओं के चलते व्यक्ति को अपने काम पर फोकस करने में समस्या होती है। इसका नकारात्मक असर उनके जीवन पर पड़ता है।
तेजी से झड़ते हैं बाल

-बाल तेजी से झड़ते हैं और मूड स्विंग्स की समस्या से व्यक्ति परेशान रहता है। कभी गुस्सा और कभी बहुत अधिक तनाव जबकि कुछ ही समय में सामान्य हो जाना जैसे स्विंग्स देखने को मिलते हैं।

Source : Agency

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