Thursday, January 28th, 2021
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कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है सामा चकेबा, भाईयों की लंबी उम्र की जाती है कामना

 पटना  
सामा ऐली कार्तिक महिनमा, संग में चकेबा लय के ना... भैया ऐला पहुना, सामा-चकेबा सनेस लेला ना... एलै कार्तिक के बहार सामा करियौ ने तैयार... इन दिनों मिथिला की बेटियां सुर में सुर लगाकर गीत गा रही हैं और सामा चकेबा संग खूब मस्ती कर रही हैं। आठ दिनों के इस पर्व का कार्तिक पूर्णिमा के दिन समापन होता है। सोमवार को इस पर्व का समापन हो जायेगा। दस दिनों के सामा चकेबा पर्व में बहनें भाई की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
गांव के खलिहान और खेतों में इसे मनाया जाता है। बहनें या तो खुद बनाती हैं या बाजार से मिट्टी का बना हुआ सामा चकेबा खरीद कर लाती हैं। इस संबंध में प्रमिला झा ने बताया कि इसमें सामा चकेबा बहन और भाई हैं। इसके साथ चुगलार्, ंवदावन, कहार आदि रहते हैं। रोज दिन-रात में भाई के नाम से पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। इसके बाद हर दिन थोड़ा-थोड़ा चुगला को जलाया जाता है ताकि भाई बुरी नजर से बच सके।
घुटनों से तोड़ा जाता है सामा चकेबा : बहन दीपिका झा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन सामा चकेबा की पूजा होती है। भाई को चूड़ा-गुड़ और लड्डू दिया जाता है। इसके बाद बहन सामा और चकेबा को पीला वस्त्र पहनाती है। चूड़ा-दही और गुड़ खिलाकर विदाई करती है। इसके बाद भाई अपने घुटने से सामा चकेबा की मूर्ति को तोड़ता है। इसके बाद बहन और भाई मिलकर सामा चकेबा को खेत में या जमीन के अंदर दबा देते हैं।

Source : Agency

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