Wednesday, June 26th, 2019

सबरीमाला: मुख्य पुजारी ने 10 से 50 साल की महिलाओं से की मंदिर नहीं आने की अपील

तिरुवनंतपुरम 
केरल के सबरीमाला मंदिर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद महिलाओं के प्रवेश को लेकर विवाद जारी है। इस बीच मुख्य पुजारी कंदारू राजीवारू ने 10-50 वर्ष की महिलाओं से सन्निधानम नहीं आने और समस्या नहीं पैदा करने की अपील की है। हालांकि इस दौरान कंदारू ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया है कि पूजा अर्चना के लिए एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के भगवान अयप्पा मंदिर में प्रवेश करने पर इस मंदिर को तंत्री परिवार द्वारा बंद कर देने की योजना है। उधर, दूसरे दिन गुरुवार को भी केरल में तनाव बना रहा। राज्य में कथित तौर पर पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर हमले के खिलाफ बंद रखा गया। 
 

राजीवारू ने सोशल मीडिया पर इस बारे में कुछ खबरों के व्यापक रूप से साझा किए जाने के बाद मंदिर परिसर, सन्निधानम में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा, 'मासिक पूजा और अनुष्ठान करना हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है। हम परंपरा नहीं तोड़ेंगे।' 

मुख्य पुजारी ने कहा, 'हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। लेकिन, श्रद्धालुओं की भावनाओं और मंदिर की परंपरा एवं रीति रिवाज पर विचार करते हुए मैं आपसे (युवतियों से) सबरीमाला नहीं आने का विनम्र अनुरोध करता हूं।' 

इस दौरान राजीवारू ने हर किसी से यह अनुरोध किया कि वे मंदिर परिसर को रणक्षेत्र में तब्दील नहीं करें। उधर, पलक्कड जिले के वीएन वासुदेवन नंबूदरी को सबरीमाला भगवान अयप्पा मंदिर का अगले एक साल के लिए नया मुख्य पुजारी चुना गया है। वह फिलहाल बेंगलुरु में अयप्पा मंदिर में पुजारी के तौर पर सेवा दे रहे हैं। चेंगन्नूर के रहने वाले एमएन नारायणन नंबूदरी मलिकाप्पुरम मंदिर के नए पुजारी होंगे। दोनों पुजारी 17 नवंबर से अपना कामकाज संभालेंगे। 

महिला पत्रकार को लौटने पर किया मजबूर 
उधर, भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमला पहाड़ी पर चढ़ रही दिल्ली की एक महिला पत्रकार को श्रद्धालुओं ने बीच रास्ते से ही लौटने के लिए मजबूर कर दिया। भीड़ ने उन पर पत्थर भी फेंके। अपने एक विदेशी पुरुष सहकर्मी के साथ मंदिर जा रही महिला पत्रकार को अयप्पा श्रद्धालुओं के बढ़ते विरोध प्रदर्शन के चलते मारक्कोट्टम से ही उतरना पड़ गया। फिलहाल पुलिस ने उन श्रद्धालुओं के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है जिन्होंने उन्हें पहाड़ी पर चढ़ने से कथित तौर पर रोक दिया। हालांकि पुलिस ने महिला पत्रकार और उसके सहकर्मी के आसपास सुरक्षा घेरा बनाया हुआ था। पुलिस का कहना है कि उन्होंने महिला पत्रकार से उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराने की बात कही, लेकिन उन्होंने पहाड़ी पर आगे जाने से इनकार कर दिया। 

 
हिंसा पर केंद्र की भी नजर 
इधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय में केरल में हुए हिंसा का संज्ञान लिया है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र की घटना पर कड़ी नजर है। बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती के बावजूद दर्शन के लिए जा रहीं महिलाओं को लौटा दिया गया है। उधर, प्रदर्शनकारियों ने मीडिया पर भी हमला बोल दिया। निलक्कल के रास्ते में प्रदर्शनकारियों ने कुछ चैनलों के पत्रकारों और उनकी टीम को निशाना बनाया है। बाद में पुलिस ने अपनी गाड़ी में उन्हें सुरक्षित वहां से बाहर निकाला। उधर, पुलिस ने निलक्कल और पंपा में विरोध कर रहे त्रावणकोर देवासम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सहित 50 लोगों को हिरासत में लिया है। 

हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच खुले कपाट 
बता दें कि केरल में हिंसक विरोध प्रदर्शन और तनाव के बीच सबरीमाला मंदिर के कपाट बुधवार को खुल गए। हालांकि सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 10 से 50 साल की उम्र वाली कोई भी महिला भगवान अयप्पा के दर्शन करने में कामयाब नहीं हो सकीं। मंदिर की तरफ जाने वाले रास्तों को प्रदर्शनकारियों ने रोक रखा है और महिलाओं को वापस भेजा जा रहा है। इस बीच, केरल के निल्लकल, पंपा, एल्वाकुलम, सन्निधनम में धारा 144 लागू कर दी गई है। इस इलाके में एकसाथ चार से ज्यादा लोग एकत्र नहीं हो सकते हैं। 
 

Source : Agency

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