Chaitra Navratri 2025: अच्छा जीवनसाथी के लिये नवरात्रि पर करें मां कात्यायीन की पूजा

Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में मां के जयकारे से हर जगह धार्मि माहैल है। वहीं नवरात्रि के छठवें दिन अगर कात्यायनी की विधिविधान से पूजा पाठ किया जाए तो उसे अच्छा जीवन साथी मिलता है।

Chaitra Navratri 2025: उज्जवल प्रदेश डेस्क. चैत्र नवरात्रि में मां के जयकारे से हर जगह धार्मि माहैल है। वहीं नवरात्रि के छठवें दिन अगर कात्यायनी की विधिविधान से पूजा पाठ की जाए तो उसे अच्छा जीवन साथी मिलता है आज गुरुवार को नवरात्रि के छठवें दिन उनकी पूजा होती है।

एक कथा के अनुसार ऋषि कात्यायन के घर जन्म होने से उनका नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी की पूजा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, इन चारों पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। यह भी माना जाता है कि कुंवारे लड़के और लड़कियां मां कात्यायिनी की पूजा पूरे विधि विधान से करते हैं, तो उन्हें सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

मां कात्यायनी की पूजा का यह है महत्व

यूपी में ब्रजभूमि में माता कात्यायनी की पूजा होती है। कहते हैं कि ब्रज की कन्याओं ने श्रीकृष्ण के प्रेम के लिए इनकी आराधना की। श्रीकृष्ण ने भी देवी कात्यायनी की पूजा की थी। गीता में भी बताया गया है कि राधारानी और गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी पीठ में पूजा अर्चना की थी। मां ने उन्हें वरदान दिया, लेकिन, भगवान कृष्ण एक थे और गोपियां अनेक, इसलिए, यह संभव नहीं था। भगवान कृष्ण ने देवी के इस वरदान को पूरा करने के लिए सभी गोपियों के लिए महारास किया।

मां कात्यायनी अभय और वरदान देती हैं

चैत्र नवरात्रि में मां कात्यायनी सुनहरे वर्ण वाली चमत्कारिक देवी हैं। उनकी चार भुजाएं हैं और वे रत्नों से सजी हैं। वह शेर पर सवार रहती हैं और हमेशा हमला करने के लिए तैयार रहती हैं। उनका तेज सभी देवताओं के तेज से मिलकर बना है। देवी कात्यायनी भक्तों को अभय और वरदान देती हैं। मां कात्यायनी दाहिनी ओर ऊपर वाले हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।

मां को शहद से बने हलवे का भोग लगाएं

मां कात्यायनी को पीला रंग बहुत पसंद है, इसलिए भक्त उन्हें पीले रंग की मिठाई अर्पित करते हैं। यह माना जाता है कि ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं। इसके साथ ही, मां को शहद से बने हलवे का भोग भी लगाया जाता है। आप सूजी का हलवा बनाकर उसमें शहद मिलाकर भी मां को अर्पित कर सकते हैं, ऐसा करने से मां कात्यायनी की कृपा प्राप्त होती है।

कपूर जलाकर मां कात्यायनी की आरती करें

मां के भक्त सूर्यउदय से पहले स्नान ध्यान करके, पीले या लाल वस्त्र धारण कर मां की आराधना करते हैं और पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करके, कलश का पूजन किया जाता है। मां कात्यायनी को वस्त्र अर्पित करके, घी का दीपक जलाया जाता है।

रोली का तिलक, अक्षत, धूप और पीले फूल मां को चढ़ाए जाते हैं। उसके बाद पान के पत्ते पर शहद और बताशे में लौंग रखकर मां का भोग लगाया जाता है। अंत में कपूर जलाकर मां कात्यायनी की आरती की जाती है।

नोट: हम इन सभी बातों की पुष्टि नहीं करते। अमल करने से पहले संबंधित विषय विशेषज्ञ से संपर्क करें।

Deepak Vishwakarma

दीपक विश्वकर्मा एक अनुभवी समाचार संपादक और लेखक हैं, जिनके पास 13 वर्षों का गहरा अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं में कार्य किया है, जिसमें समाचार लेखन, संपादन… More »

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