WAQF BILL: रविशंकर प्रसाद बोले- ‘GREEN BOOK’ के आर्टिकल 15 से होगा मुसलमानों का ‘SACHCHAR’ विकास

WAQF BILL: वक्फ संशोधन बिल पर पर लोकसभा में जोरदार डिबेट चल रही है। पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने 'हरी किताब' का जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिकल 15 कहता है कि लिंग, क्षेत्र, भाषा और नस्ल के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं हो सकता। संशोधित बिल में पिछड़े मुसलमानों को भी प्रतिनिधित्व देने और सच्चर कमेटी की अनुशंसा के अनुसार विकास की बात मेंआखिर परेशानी क्या है।

WAQF BILL: नई दिल्ली. वक्फ बिल पर लोकसभा में जोरदार डिबेट चल रही है। बिल को पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने साफ किया कि इससे मुसलमानों के हालात सुधरेंगे। इस बिल को इसीलिए ‘उम्मीद’ नाम दिया गया है। उनके बाद कांग्रेस के गौरव गोगोई खड़े हुए तो सरकार पर मुस्लिमों पर अत्याचार करने और समाज को बांटने का आरोप लगाया। इस मामले पर रविशंकर प्रसाद ने भी जोरदार भाषण दिया।

उन्होंने कहा कि विपक्ष का कहना है कि वक्फ बिल में संशोधन होना चाहिए और कहते हैं कि नहीं भी होना चाहिए। आज कल लाल किताब बहुत दिखती है, लेकिन हम संसद में संविधान की हरी किताब लेकर आए हैं। संविधान में लिखा है कि महिलाओं के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा और यदि सरकार उन्हें सशक्त करने के लिए कोई कानून ला रही है तो यह गलत कैसे हुआ।

रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) ने ‘हरी किताब’ (GREEN BOOK) का जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिकल 15 (Article 15) कहता है कि लिंग, क्षेत्र, भाषा और नस्ल के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं हो सकता। मैं बिहार से आता हूं और वहां बड़ी संख्या पसमांदा मुस्लिमों (Muslims) की है। यूपी में भी इनकी बड़ी आबादी है। यदि नए बिल में वक्फ बोर्ड में पिछड़े मुसलमानों को भी प्रतिनिधित्व देने और सच्चर (‘SACHCHAR’) कमेटी की अनुशंसा के अनुसार विकास (Development) की बात है तो फिर आखिर परेशानी क्या है।

उन्होंने कहा कि अब तक वक्फ बिल में जितने भी बदलाव हुए हैं, सब मौलानाओं के दबाव में हुए। 1995 में बदलाव तब आया, जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था। तब इन्होंने तुष्टीकरण के लिए वक्फ बिल में बदलाव कर दिया। आखिर यह तुष्टिकरण की राजनीति हुई या फिर मुसलमानों के हित साधने की कोशिश हुई।

आर्टिकल 15 का उदाहरण देकर बताया- किसे मिलेगा फायदा

उन्होंने कहा कि वक्फ बिल में जो संशोधन हो रहा है, उसकी अनुमति संविधान का आर्टिकल 15 देता है। वक्फ की संपत्ति को लूटा जा रहा है और सरकार कैसे देखकर चुप रह सकती है। उन्होंने कहा कि 8.2 लाख वक्फ संपत्तियां हैं। बताया जाए कि इन संपत्तियों पर कितने स्कूल, अनाथालय, स्किल सेंटर खुले हैं? यदि यह गिनती होने लगे तो पता चलेगा कि क्या हकीकत है।

आज यदि वक्फ बिल से हालात सुधारने की कोशिश है तो इनको परेशानी क्या है। इसकी वजह यह है कि दिल से कहते हैं कि संशोधन हो, लेकिन राजनीतिक मजबूरी इनके पैर खींचती है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इन लोगों की भाषा नहीं बदल रही है।

शाहबानो से सायरा बानो तक यही कहानी

याद करिए कि सुप्रीम कोर्ट ने जब शाहबानो केस में गुजारे भत्ते का आदेश दिया गया तो उस फैसले को ही पलट दिया गया। 75 साल की विधवा महिला को कुछ 100 रुपये दिए गए तो हंगामा खड़ा कर दिया गया। शाहबानो से सायरा बानो तक यही कहानी है। तीन तलाक के खिलाफ मुस्लिम महिलाएं जब सुप्रीम कोर्ट में गईं तो इनकी सरकार ने दो साल तक जवाब ही नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आज सरकार मुस्लिमों की संपत्ति को लूट से बचाने के लिए बिल लाई है तो हंगामा हो रहा है।

आखिर देश कहां जाएगा, सीएए पर भी बवाल किया

यह सवाल तो बनता ही है कि आखिर वोट बैंक के लिए देश कहां तक जाएगा। सीएए पर क्या-क्या सवाल खड़ा किया गया। हिंदुओं, ईसाइयों और सिखों को भारत लाया गया, जिनका बाहर उत्पीड़न हो रहा था। उससे भारत के मुसलमानों पर कोई असर नहीं हुआ। यह सोचने की बात है कि मुस्लिम जमात के आदर्श कौन हैं। क्या मुस्लिम समाज के आदर्श वोटों की सौदागरी करने वाले होंगे। उनके आदर्श मौलाना आजाद, अशफाक, कबीर, मलिक मोहम्मद जायसी और अब्दुल हमीद होंगे।

Deepak Vishwakarma

दीपक विश्वकर्मा एक अनुभवी समाचार संपादक और लेखक हैं, जिनके पास 13 वर्षों का गहरा अनुभव है। उन्होंने पत्रकारिता के विभिन्न पहलुओं में कार्य किया है, जिसमें समाचार लेखन, संपादन और कंटेंट निर्माण प्रमुख हैं। दीपक ने कई प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम करते हुए संपादकीय टीमों का नेतृत्व किया और सटीक, निष्पक्ष, और प्रभावशाली खबरें तैयार कीं। वे अपनी लेखनी में समाजिक मुद्दों, राजनीति, और संस्कृति पर गहरी समझ और दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। दीपक का उद्देश्य हमेशा गुणवत्तापूर्ण और प्रामाणिक सामग्री का निर्माण करना रहा है, जिससे लोग सच्ची और सूचनात्मक खबरें प्राप्त कर सकें। वह हमेशा मीडिया की बदलती दुनिया में नई तकनीकों और ट्रेंड्स के साथ अपने काम को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत रहते हैं।

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